वयस्क के रूप में ऑटिज़्म की जाँच कैसे करवाएँ
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ज़्यादा से ज़्यादा वयस्क यह सोचने लगे हैं कि कहीं वे ऑटिस्टिक तो नहीं, अक्सर ऑटिज़्म के बारे में पढ़ने, किसी और की कहानी में खुद को पहचानने या कोई ऑनलाइन टेस्ट देने के बाद। लेकिन वयस्क के रूप में जाँच असल में कैसे करवाई जाती है? इस गाइड में हम आम तौर पर उठाए जाने वाले कदमों, जाँच में क्या-क्या होता है, और आप तैयारी कैसे कर सकते हैं, इन सब पर बात करेंगे।
जाँच क्यों करवाएँ?
जाँच करवाना एक निजी फ़ैसला है। बहुत से लोग बताते हैं कि निदान से उन्हें उन अनुभवों की वजह समझ आई जो उनके साथ पूरी ज़िंदगी रहे हैं। इससे काम या पढ़ाई में सहायता और ज़रूरी बदलाव भी मिल सकते हैं, और आपको और आपके आसपास के लोगों को आपकी ज़रूरतें बेहतर समझने में मदद मिल सकती है। कुछ लोग जाँच न करवाने का फ़ैसला करते हैं, या उन्हें लगता है कि खुद को समझ लेना ही काफ़ी है। दोनों ही फ़ैसले सही हैं।
कदम 1: अपने अनुभव इकट्ठा करें
डॉक्टर से संपर्क करने से पहले यह लिख लेना मददगार होता है कि आपको क्यों लगता है कि आप ऑटिस्टिक हो सकते हैं। आम विवरणों से ज़्यादा काम के ठोस उदाहरण होते हैं:
- सामाजिक स्थितियाँ: आपको क्या मुश्किल या थका देने वाला लगता है, और आप उसे कैसे संभालते हैं?
- रूटीन और रुचियाँ: बदलावों पर आपकी प्रतिक्रिया कैसी होती है? किन चीज़ों में आपकी गहरी रुचि है?
- इंद्रियाँ: क्या कुछ आवाज़ें, रोशनी, गंध या बनावट आपको बहुत परेशान करती हैं?
- बचपन: बचपन में आप कैसे थे? क्या आपके दोस्त थे? टीचर आपके बारे में क्या कहते थे?
- असर: इन बातों का आपके काम, पढ़ाई, रिश्तों और सेहत पर क्या असर पड़ता है?
AQ-50 और RAADS-R जैसी स्क्रीनिंग प्रश्नावलियों के नतीजे साथ ले जाना भी उपयोगी हो सकता है। ये निदान नहीं हैं, लेकिन इनसे डॉक्टर को पता चल सकता है कि आप यह सवाल क्यों उठा रहे हैं।
कदम 2: अपने डॉक्टर से बात करें
ज़्यादातर देशों में पहला कदम आपका नियमित डॉक्टर या कोई दूसरी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा होती है। उन्हें बताएँ कि आपको लगता है कि आप ऑटिस्टिक हो सकते हैं और आप जाँच करवाना चाहते हैं। समझाएँ कि इसका आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर क्या असर पड़ता है, और जो आपने लिखा है वह उन्हें दिखाएँ। कई जगहों पर डॉक्टर को आपको किसी विशेषज्ञ सेवा के पास रेफ़र करना होता है।
कुछ लोगों को शक की नज़र से देखा जाता है, खासकर अगर उनके पास नौकरी हो, परिवार हो या ऊपर से उनका सामाजिक व्यवहार अच्छा दिखता हो। ऐसे में यह बताना मदद कर सकता है कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी संभालने में आपको कितनी कीमत चुकानी पड़ती है, या यह पूछना कि रेफ़रल के लिए क्या ज़रूरी होगा। आप किसी दूसरे डॉक्टर की राय भी ले सकते हैं।
कदम 3: जाँच
वयस्कों में ऑटिज़्म की जाँच आमतौर पर कोई साइकियाट्रिस्ट, साइकोलॉजिस्ट या अलग-अलग पेशों के विशेषज्ञों की टीम करती है। इसमें अक्सर कई मुलाकातें लगती हैं और इसमें ये चीज़ें शामिल हो सकती हैं:
- इंटरव्यू, आपकी मौजूदा ज़िंदगी, आपके अतीत और आपकी मुश्किलों के बारे में।
- आपके बचपन की जानकारी, बेहतर हो कि माता-पिता या किसी ऐसे व्यक्ति से जो आपको बचपन से जानता हो। पुराने स्कूल रिपोर्ट कार्ड भी मदद कर सकते हैं।
- प्रश्नावलियाँ, जिन्हें आप और कभी-कभी आपके करीबी लोग भरते हैं।
- व्यवस्थित अवलोकन, जिसमें विशेषज्ञ कुछ तय कामों के दौरान देखते हैं कि आप कैसे बातचीत और मेल-जोल करते हैं।
- दूसरी स्थितियों की जाँच, जैसे ADHD, एंग्ज़ायटी या डिप्रेशन, जो ऑटिज़्म के साथ हो सकती हैं या उन्हीं मुश्किलों में से कुछ की वजह हो सकती हैं।
आखिर में आपको नतीजे के बारे में बताया जाता है, अक्सर लिखित रिपोर्ट के साथ। अगर निदान होता है, तो रिपोर्ट में आमतौर पर आपकी खूबियाँ और चुनौतियाँ, और किस तरह की सहायता मदद कर सकती है, यह बताया जाता है।
इंतज़ार का समय और प्राइवेट जाँच
कई देशों में वयस्कों के लिए सरकारी खर्च पर होने वाली जाँच का इंतज़ार लंबा होता है, कभी-कभी कई साल। कुछ लोग जल्दी जाँच के लिए प्राइवेट विकल्प चुनते हैं। अगर आप ऐसा करते हैं, तो पक्का कर लें कि जाँच करने वाला व्यक्ति योग्य हो और उसे वयस्कों में ऑटिज़्म का अनुभव हो, और यह भी पता कर लें कि आपकी स्वास्थ्य सेवा, शिक्षण संस्थान या नियोक्ता उस निदान को मानेंगे या नहीं।
भारत में शुरुआत कहाँ से करें
भारत में आमतौर पर शुरुआत किसी साइकियाट्रिस्ट या क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट से होती है, चाहे वह किसी सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में हो या प्राइवेट प्रैक्टिस में। आप अपने फ़ैमिली डॉक्टर से भी शुरुआत कर सकते हैं और उनसे किसी ऐसे विशेषज्ञ के पास भेजने को कह सकते हैं जो वयस्कों की जाँच करता हो।
वयस्कों में ऑटिज़्म की जाँच का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ अभी कम हैं और ज़्यादातर बड़े शहरों और कुछ बड़े मेडिकल संस्थानों में मिलते हैं। इसलिए अपॉइंटमेंट लेने से पहले पूछ लेना अच्छा है कि वे वयस्कों की ऑटिज़्म जाँच करते हैं या नहीं। सरकारी अस्पतालों में इंतज़ार लंबा हो सकता है, और प्राइवेट जाँच का खर्च आमतौर पर खुद उठाना पड़ता है।
जाँच के बाद
नतीजा जो भी हो, जाँच से आप खुद को बेहतर समझ सकते हैं। अगर निदान होता है, तो ऑटिज़्म के बारे में पढ़ना, बात करने के लिए दूसरे ऑटिस्टिक वयस्कों को ढूँढना, और यह सोचना मददगार हो सकता है कि कौन-से बदलाव रोज़मर्रा की ज़िंदगी आसान बना सकते हैं। अगर निदान नहीं होता, तब भी जाँच से आपकी मुश्किलों की दूसरी वजहों का, और आपके लिए ज़्यादा सही मदद का पता चल सकता है।
स्क्रीनिंग से शुरुआत करना चाहते हैं? AQ-50, RAADS-R या CAT-Q मुफ़्त में दें।